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वायरस में म्यूटेशन इसे बना रहा है चिंताजनक : 70 से ज्यादा म्यूटेशन वाला कोरोना का नया वैरिएंट कितना खतरनाक, किसे ज्यादा खतरा? जानिए विस्तार से

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कुछ महीनों से शांत पड़ा कोरोनावायरस इन दिनों एक बार फिर से सुर्खियों में है। इस बार चिंता की वजह सिर्फ नया वैरिएंट नहीं है, बल्कि वायरस में नोटिस किए गए 70 से ज्यादा म्यूटेशन को लेकर विशेषज्ञों ने अलर्ट किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में जेनेटिक बदलाव वायरस को ज्यादा संक्रामक बना सकते हैं। शुरुआती रिपोर्ट्स में पता चला है कि यह इम्यून सिस्टम को चकमा देने में पहले की तुलना में ज्यादा सक्षम हो रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार कोरोना के इस नए खतरे की निगरानी कर रही हैं और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। अमर उजाला में शनिवार को प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया था कि ये नया वैरिएंट 23 से अधिक देशों में फैल चुका है। इससे उन लोगों में भी संक्रमण का खतरा जताया जा रहा हैजो पहले के संक्रमण और वैक्सीन से इम्युनिटी बना चुके थे।

कोरोना का ये नया वैरिएंट BA.3.2 सिकाडा से किसे ज्यादा खतरा है, क्या फिर से लोगों को बूस्टर डोज लेनी की जरूरत पड़ने वाली है? आइए इस रिपोर्ट में इस बारे में विस्तार से समझते हैं।

वायरस में म्यूटेशन इसे बना रहा है चिंताजनक

अध्ययनों से पता चलता है कि वायरस में म्यूटेशन होना सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन जब किसी वैरिएंट में बड़ी संख्या में बदलाव आते हैं तो वह पहले की तुलना में ज्यादा संक्रामक और इम्युनिटी को चकमा देने वाला हो सकता है। प्रारंभिक डेटा से संकेत मिलता है कि कोरोना के संक्रमण की रफ्तार फिलहाल तो ज्यादा नहीं है लेकिन कुछ लोगों में इससे ज्यादा खतरा हो सकता है।

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सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) की रिपोर्ट के अनुसार ये नया वैरिएंट अब तक 23 देशों में और अमेरिका के 25 स्टेट्स के सीवेज के पानी में भी पाया गया है। यूनाइटेड किंगडम (यूके) फिलहाल इससे सबसे अधिक प्रभावित माना जा रहा है। अमेरिका में अभी ये कम स्तर पर फैल रहा है, हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना के शांत होने के बाद से दुनियाभर में टेस्टिंग भी कम कर दी थी, इसलिए हो सकता है कि यह जितना अभी पता है उससे कहीं ज्यादा फैला हुआ हो।

किसे इस नए वैरिएंट से खतरा ज्यादा

वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना की लहर शांत होने के बाद दुनियाभर में वैक्सीनेशन की दर भी काफी कम हो गई थी। इस वजह से ज्यादातर लोगों में आखिरी टीका लगे दो साल से ज्यादा का समय हो गया है। लोगों की वायरस के प्रति इम्युनिटी पहले जैसी नहीं है, ऐसे में जहां इसका प्रसार है वहां सभी आयु वालों में इसका खतरा हो सकता है।

  • नया वैरिएंट सिकाडा वैसे तो सभी आयु वर्ग के लोगों को संक्रमित करने वाला हो सकता है, पर ये मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित करता दिख रहा है।

  • हालांकि, यह बच्चों या बड़ों में कोई ज्यादा गंभीर बीमारी पैदा नहीं कर रहा है।

  • विशेषज्ञों का कहना है कि वायरस अपना वह पैटर्न तोड़ रहा है जिसमें ये मुख्य रूप से बुजुर्गों के लिए खतरा बना रहता था।

  • यह ऐसी चीज है जिसका अध्ययन और जिसे समझना जरूरी है, ताकि इसके खतरों का अंदाजा लगाया जा सके।

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